उज्जैन, 24 सितम्बर। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश भर में उन हितग्राहियों की प्रेरक गाथाएँ साझा की जा रही हैं, जिनके जीवन में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से वास्तविक परिवर्तन आया है। जिला उज्जैन के विकासखंड महिदपुर अंतर्गत ग्राम खेड़ाखजूरिया की श्रीमती टीना दीदी की कहानी इसी भावना की सजीव मिसाल है। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकाला, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गईं।

हितग्राही परिचय: श्रीमती टीना (पति श्री राजू), ग्राम खेड़ाखजूरिया, विकासखंड महिदपुर। 12वीं पास। जय श्री महाकाल स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष। जुड़ाव: 08 जनवरी 2020। ग्राम संगठन: खेड़ाखजूरिया आजीविका ग्राम संगठन। सी.एल.एफ.: अटल संकुल स्तरीय संगठन, खेड़ाखजूरिया। भूमिका: बैंक सखी, लेखापाल, सी.आर.पी.। आजीविका: जनरल स्टोर तथा फूल-बत्ती निर्माण एवं विक्रय।

पूर्व स्थिति: परिवार की मासिक आय मात्र लगभग 8,000 रुपये, व्यक्तिगत आय शून्य। पति दैनिक मजदूरी करते थे, कृषि भूमि और पैदावार सीमित थी। बच्चों की अच्छी शिक्षा और बेहतर जीवन स्तर दूर की बात थी।

जुड़ाव एवं क्षमतावर्धन: वर्ष 2020 में आजीविका मिशन की टीम ग्राम पहुँची। टीना दीदी ने मोहल्ले की 12 महिलाओं के साथ समूह बनाया। बैंक सखी, बुक किपर और लखपति दीदी का प्रशिक्षण लेकर सी.आर.पी. बनीं। भोपाल से प्रशिक्षण के बाद विकासखंड स्तर पर सी.टी.सी. की लेखापाल के रूप में कार्यरत हैं।

आर्थिक सशक्तिकरण: आर.एफ. 1,000 रुपये, सी.आई.एफ. 7,500 रुपये तथा सी.सी.एल. 50,000 रुपये से जनरल स्टोर शुरू किया। वर्ष 2025-26 में “एक बगिया माँ के नाम” का लाभ मिला। सखी स्वावलंबन योजना से फूल-बत्ती बनाने की मशीन खरीदी और घर से निर्माण-विक्रय शुरू किया। लाड़ली बहना योजना का लाभ भी परिवार को मिल रहा है। पति श्री राजू ने मोटर मैकेनिक प्रशिक्षण लेकर होंडा शोरूम में नियमित कार्य शुरू किया।

आय में परिवर्तन: व्यक्तिगत आय शून्य से 10,000 रुपये मासिक, परिवार की आय 8,000 से 18,000 रुपये मासिक।

सम्मान: दिनांक 26 अगस्त 2026 को उत्कृष्ट सी.आर.पी. कार्य हेतु माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा निःशुल्क ई-साइकिल प्रदाय की गई।

सेवा संकल्प से जुड़ाव: अभियान (17 सितम्बर–17 अक्टूबर 2026) का प्रमुख आयाम “कहानी बदलाव की” है। आजीविका मिशन, बैंक लिंकेज, लखपति दीदी प्रशिक्षण, लाड़ली बहना, एक बगिया माँ के नाम और सखी स्वावलंबन — इन सबका समेकित लाभ एक परिवार तक पहुँचा। यही सेवा संकल्प की मूल भावना है — योजना अंतिम छोर तक, स्वावलंबन गाँव तक।

टीना दीदी के कार्यों से प्रेरित होकर महिदपुर की अन्य दीदियाँ भी आजीविका गतिविधियाँ अपना रही हैं और सी.आर.पी. के रूप में प्रशिक्षित हो रही हैं।