10 जुलाई 2026 को मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया की बैठक में कहा गया कि विभाग और एम्स भोपाल के बीच एमओयू किया जायेगा। वाक्य भविष्य का है। साझेदारी एम्स के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के अंतर्गत स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट से जोड़ी गई।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को गंभीर कुपोषण की पहचान और त्वरित इलाज के लिए एम्स के चिकित्सकों द्वारा क्लिनिकल प्रशिक्षण देने की योजना बताई गई। सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारी भी दायरे में हैं।

जहाँ काम शुरू बताया गया

मंत्री ने कहा कि झाबुआ और धार में यह प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। परिणाम “आने वाले समय” में देखने का उल्लेख है; इस विज्ञप्ति में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की संख्या नहीं है। बैठक में आयुक्त निधि निवेदिता, सीएफएम विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण एम. कोकने, नोडल अधिकारी डॉ. अभिजीत पाखरे और राज्य समन्वयक दीपक पाण्डेय मौजूद बताए गए।

शोध, हस्ताक्षर नहीं

एम्स के चिकित्सक गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों पर अध्ययन कर रहे बताए गए। ICMR और NCOE, नई दिल्ली के सहयोग से अनुपूरक आहार (THR) तथा परिवारों में व्यवहार-परिवर्तन संचार पर शोध का उल्लेख है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नाम प्रतिबद्धता के वाक्य में आया; यह बैठक का मंच-चित्र नहीं।

मुख्य बातें

  • एमओयू विभाग और एम्स भोपाल के स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस / स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के बीच प्रस्तावित।
  • जनजातीय बाहुल्य झाबुआ और धार में प्रशिक्षण शुरू होने का विभाग का कथन।
  • SAM बच्चों पर अध्ययन तथा ICMR और NCOE के सहयोग से THR और व्यवहार-परिवर्तन शोध चल रहा बताया गया।

स्रोत और संदर्भ

  1. जनसंपर्क विभाग, मध्यप्रदेश · म.प्र. में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधारेगी एम्स की तकनीक ↗10 जुलाई 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 18 सितंबर 2026।

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