भोपाल के जनजातीय संग्रहालय की जमीन समतल नहीं की गई; इमारत पथरीले ढलान के साथ बैठी है। वास्तुकार रेवती कामथ के विवरण में दीर्घाओं को खंभों पर उठाने से बना बहुस्तरीय बरामदा योजना की रीढ़ है।
खुले आंगन बड़े तल में रोशनी और हवा पहुंचाते हैं। अलग छतों से दीर्घाओं का पैमाना बदलता है। इस्पात की संरचना के साथ स्थानीय पत्थर, ईंट और भीतर मिट्टी का पलस्तर लगाया गया।
मध्यप्रदेश पर्यटन के विवरण में आवास-दीर्घा के घर मिट्टी, बांस, गोबर, घास और फूस से बने हैं। प्रदर्शन और भवन अलग संसार नहीं लगते; सामग्री, छत और रास्ता मिलकर संदर्भ बनाते हैं।
कामथ स्टूडियो के अनुसार भू-दृश्य वर्षाजल, बगीचों और छत की हरियाली से जुड़ा है। बरामदा ढलान पर अलग ऊंचाइयां जोड़ता, धूप से बचाता और दीर्घाओं के बीच ठहराव देता है। परियोजना-विवरण में वर्षाजल से ठंडक और हरी छतों को पोषण देने की बात भी दर्ज है।
मुख्य बातें
- दीर्घाएं खंभों पर उठाकर बहुस्तरीय बरामदा बनाया गया।
- आंगन भीतर प्रकाश और हवा पहुंचाते हैं।
- पत्थर, ईंट और मिट्टी के पलस्तर को इस्पात की संरचना के साथ जोड़ा गया।
स्रोत और संदर्भ
- रेवती कामथ डिजाइन स्टूडियो · Tribal Museum, Bhopal ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- मध्यप्रदेश पर्यटन · Tribal Museum, Bhopal ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।



